देखें फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माई बुर्का’ के विवादीद सीन्स

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भारत में बनी फिल्म लिपस्टिक अंडर माई बुर्का ऐसे तो अंतराष्ट्रीय मंचों पर कई खिताब अपने नाम कर चुकी है लेकिन भारत में सेंसर बोर्ड इस फिल्म पर अपनी नाराज़गी छोड़ने को त्यार ही नहीं है | आपको बताना चाहेंगे की इस फिल्म में कोंकणा सेन शर्मा और रत्ना पाठक शाह ने अहम् भूमिका निभाती नज़र आ रही है |

आपको बताना चाहेंगे की सेंसर बोर्ड इसे महिला प्रधान फिल्म बता रहा है और इस पर बहुत सारे कट्स लगाने को कह रहा है | वहीँ निर्देशक अलंकृता श्रीवास्तव ने नाराज़गी जाहिर की और सेंसर बोर्ड पर सवाल उठाते हुए मीडिया से बात चीत में कहा की सेंसर बोर्ड पहले बताये इसमें गलत क्या है ?

आपको बताना चाहेंगे की इस फिल्म को प्रकाश झा ने डायरेक्ट किया है और सेंसर बोर्ड की माने तो यह फिल्म पूरी तरह से महिला प्रधान समाज पर बनाई गयी है | इसलिए इस फिल्म में सभी बोल्ड सीन्स, गाली-गलौच, गंदी भाषा के सीन्स को काटने की मांग की है |

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सेंसर बोर्ड ने यह भी बताया है की यह फिल्म मुस्लिम समाज के लोगो को नाराज़ कर सकती है इसलिए उनकी भावनाओं की कदर करते हुए हम इस फिल्म को पास नहीं कर सकते | वही डायरेक्टर और प्रोडूसर्स की माने तो उन्होंने मीडिया से कहा है की हम तब तक केस लड़ेंगे जब तक इस फिल्म को बिना कट के रिलीज़ करने की इजाजत नहीं मिल जाती |

आपको बताना चाहेंगे की निर्देशक अलंकृता श्रीवास्तव ने कहा की सेंसर बोर्ड को हम कई बार चिठियाँ लिख चुके है लेकिन सेंसर बोर्ड हमें इस बात का जवाब देने में असमर्थ है की फिल्म में गलत क्या है और उसे क्यों काटा जाए |

निर्देशक ने बताया की सेंसर बोर्ड क्या चाहता है की बहरत में फिल्मे केवल पुरुष प्रधान बेस पर ही बने आखिर हम लड़की प्रधान बेस पर कोई फिल्म क्यों नहीं बना सकते है | आखिर ऐसा क्यों है की किसी फिल्म को लड़के के नजरिये से ही पेश किया जाये |

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निर्देशक ने गुस्से भरे अल्फाजों में कहा की एक युवा 18 साल के बाद देश की सरकार चुनने में तो समर्थ है लेकिन अपनी मर्जी से सिनेमा घर में आजकर फिल्म नहीं देख सकता | फिल्म से जुडी कास्ट ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर आम लोगो के बीच भी सेंसर बोर्ड के इस रवैये की काफी आलोचना हो रही है |

ज़ाहिर सी बात है देश में अभिव्यक्ति की आज़ादी है की वो फिल्म को किसी भी प्रकार से बना सकता है और जिसे पसंद आये वो देखने भी जा सकता है | इसलिए सेंसर बोर्ड को अभिव्यक्ति की आज़ादी का ध्यान रखते हुए ही अपने फैसले लेने चाहिए |

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